कुटुंब प्रबोधन: परिवार संस्कार, सेवा, सामूहिकता का केंद्र रहा है।
सारे कुटुंब का समय पर सामूहिक भोजन।
• नियमित रूप से अपने पूर्वजों, मान्यताओं, बोली-भाषा, साहित्य की चर्चा।
• विवाह, जन्मोत्सव, वार्षिक उत्सव इत्यादि में मंगलवेश, भारतीय परंपरा।
• राष्ट्र के विषय में वार्ता व मंथन।
• कुटुंब मित्र बनाना।



