ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः | सर्वे भद्रान्नि पश्यन्तु, माँ कश्चिद्-दुःख-भाग-भवेत् ||     ॐ शांतिः शांतिः शांतिः                                                                   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष (विक्रम संवत 1982–2082)                                                                  

कुटुंब प्रबोधन

कुटुंब प्रबोधन: परिवार संस्कार, सेवा, सामूहिकता का केंद्र रहा है।

सारे कुटुंब का समय पर सामूहिक भोजन।
•⁠ ⁠नियमित रूप से अपने पूर्वजों, मान्यताओं, बोली-भाषा, साहित्य की चर्चा।
•⁠ ⁠विवाह, जन्मोत्सव, वार्षिक उत्सव इत्यादि में मंगलवेश, भारतीय परंपरा।
•⁠ ⁠राष्ट्र के विषय में वार्ता व मंथन।
•⁠ ⁠कुटुंब मित्र बनाना।