भारत के समाज रचना में जातीय विषमता, अस्पृश्यता, भेदभाव कब कैसे आ गए, किंतु इससे समाज व राष्ट्र को बहुत हानि हुई है। यह अमानवीयता पूरी तरह समाप्त करने का पूर्ण प्रयास हमारे मन मस्तिष्क में रहे इस पर सहजता से एकनिष्ठ भावना से सभी जातिय समूहों से सहज मित्रता, परिवार में आवागमन, जलपान, समारोहों में निमंत्रण कर समर्थ समाज का निर्माण।



