ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः | सर्वे भद्रान्नि पश्यन्तु, माँ कश्चिद्-दुःख-भाग-भवेत् ||     ॐ शांतिः शांतिः शांतिः                                                                   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष (विक्रम संवत 1982–2082)                                                                  

सामाजिक समरसता

भारत के समाज रचना में जातीय विषमता, अस्पृश्यता, भेदभाव कब कैसे आ गए, किंतु इससे समाज व राष्ट्र को बहुत हानि हुई है। यह अमानवीयता पूरी तरह समाप्त करने का पूर्ण प्रयास हमारे मन मस्तिष्क में रहे इस पर सहजता से एकनिष्ठ भावना से सभी जातिय समूहों से सहज मित्रता, परिवार में आवागमन, जलपान, समारोहों में निमंत्रण कर समर्थ समाज का निर्माण।