ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः | सर्वे भद्रान्नि पश्यन्तु, माँ कश्चिद्-दुःख-भाग-भवेत् ||     ॐ शांतिः शांतिः शांतिः                                                                   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष (विक्रम संवत 1982–2082)                                                                  
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उत्तराखंड : सेवा भारती के सेवा कार्यों से बदल रहा समाज का दृष्टिकोण – डॉ. शैलेन्द्र

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उत्तराखंड : सेवा भारती के सेवा कार्यों से बदल रहा समाज का दृष्टिकोण – डॉ. शैलेन्द्र
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17 May 2026

देहरादून में सेवा भारती के वार्षिकोत्सव में RSS के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के बिना विकसित भारत अधूरा है। दून विवि की कुलपति सुरेखा डंगवाल ने भी सेवा भाव को संस्कृति का डीएनए बताया

देहरादून । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखंड के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि समाज के उपेक्षित, वंचित और अभावग्रस्त वर्गों के उत्थान के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति मुख्यधारा से नहीं जुड़ता, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सेवा भारती इसी उद्देश्य को लेकर वर्षों से समाज के बीच सेवा कार्यों का विस्तार कर रही है।

रविवार को सर्वे चौक स्थित आईआरडी सभागार में सेवा भारती देहरादून महानगर के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए  डॉ. शैलेन्द्र ने यह  बातें कही। उत्तरी महानगर अध्यक्ष सतीश डंगवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

इस  मौके पर प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र ने कहा कि सेवा भारती के विभिन्न सेवा प्रकल्पों और संस्मरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार और स्वावलंबन के माध्यम से सेवा भारती जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि संगठन अब विवाह संस्कार जैसे सामाजिक नवाचारों पर भी कार्य कर रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि जब समाज के सामने सेवा कार्यों के वास्तविक परिणाम दिखाई देते हैं तो लोग स्वयं आगे आकर सहयोग करने लगते हैं।

उन्होंने कहा कि आज महिलाएं और बहनें सेवा भारती सहित समाज के हर क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभा रही हैं। सेवा कार्यों में उनकी सहभागिता समाज को नई दिशा देने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सेवा और संवेदना के कार्यों से लोगों की सोच बदलती है और समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार होता है।

डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि घुमंतू समाज, झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले परिवारों  और अभावग्रस्त लोगों तक पहुंचना आज समय की आवश्यकता है। सेवा कार्य के लिए कोई सीमा या स्थान तय नहीं होता, जहां आवश्यकता होती है वहीं सेवा का दायित्व शुरू हो जाता है।

उन्होंने कहा कि सेवा भारती का पूरा कार्य समाज के सहयोग और सहभागिता से संचालित हो रहा है। समाज के सहयोग से ही संगठन निरंतर नए सेवा प्रकल्पों को आगे बढ़ा रहा है और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचा रहा है।

प्रांत प्रचारक ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से उन्होंने सेवा कार्यों से जुड़ने और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में योगदान देने का आह्वान भी किया।

सेवा का भाव भारतीय संस्कृतिके डीएनए में शामिल

दून विश्वविद्यालय की कुलपति सुरेखा डंगवाल ने बतौर मुख्य अतिथि  कहा कि भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता सामूहिक चेतना और सेवा भाव है। हमारी संस्कृति केवल अपने तक सीमित नहीं रही, बल्कि पड़ोसी देशों के सहयोग की भावना भी भारतीय परंपरा का हिस्सा रही है।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में व्यक्तिगत सोच अधिक देखने को मिलती है, जबकि भारतीय समाज परिवार और सामाजिक रिश्तों को महत्व देता है। उन्होंने कहा कि आज समाज में बढ़ते असंतोष को समझने और परिवार व समाज के रिश्तों को मजबूत करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है। सेवा का भाव भारतीय संस्कृति के डीएनए में शामिल है और सेवा भारती इसी मुहिम के तहत अंतिम व्यक्ति तक सेवा कार्य पहुंचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हमें अपने बुजुर्गों के अनुभवों और बातों को भी महत्व देना चाहिए।

प्रो. डंगवाल ने कहा कि सेवा का भाव भीतर से जागृत होना चाहिए। कोई भी बच्चा केवल फीस के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए समाज को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में बलहीन व्यक्ति का भी सम्मान और पूजा की जाती है। समाज के कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य करना ही वास्तविक सेवा है।

उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वार्थ और भूख समाज को कमजोर कर रही है। स्वामी विवेकानंद के विचारों का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि आज बस्तियों और जरूरतमंद लोगों के बीच सेवा कार्य की सबसे अधिक आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने महर्षि दधीचि को सेवा और दान की प्रेरणा का प्रतीक बताया।

उन्होंने  कहा कि आज युवाओं और बच्चों को केवल पैकेज आधारित तनाव में उलझे है। उन्होंने उनको इस सोच से बाहर निकलकर सेवा और संस्कार आधारित जीवन अपनाने का संदेश दिया।

84 बस्तियों में सेवा भारती के 109 केंद्रों से संवर रहा जरूरतमंदों का भविष्य

कार्यक्रम में सेवा भारती केंद्र की शिक्षिकाओं ने प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। इस दौरान बताया गया कि सेवा भारती की ओर से वर्तमान में 84 बस्तियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन एवं सामाजिक समरसता के उद्देश्य को लेकर कुल 109 सेवा केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भरता तथा समाज के वंचित वर्गों को सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

बाल संस्कार केंद्र के बच्चों ने दी शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

इस अवसर पर बाल संस्कार केंद्र के बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। बच्चों ने देशभक्ति गीत, समूह नृत्य और संस्कारपरक प्रस्तुतियों से खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्कार केंद्र समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।

मंच संचालन सुनीता पाण्डेय और ऋतु सिंघल ने संयुक्त रूप किया।  इस मौके पर विभाग प्रचारक  धनंजय, सेवा भारती के प्रांत  मंत्री विमल, सेवा प्रमुख उतरी सुधीर, दक्षिण विजय, आनंद प्रकाश सहित  बड़ी संख्या में अन्य लोग उपस्थित रहे।

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