ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः | सर्वे भद्रान्नि पश्यन्तु, माँ कश्चिद्-दुःख-भाग-भवेत् ||     ॐ शांतिः शांतिः शांतिः                                                                   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष (विक्रम संवत 1982–2082)                                                                  
vskuttarakhand
  • होम
  • उत्तराखण्ड सम्वाद
  • देश
  • प्रदेश
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • ऊधम सिंह नगर
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी गढ़वाल
    • देहरादून
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • पंच परिवर्तन
    • कुटुंब प्रबोधन
    • सामाजिक समरसता
    • पर्यावरण
    • स्व का बोध
    • नागरिक कर्तव्य
  • विचार
    • अध्यात्म
    • आयुर्वेद
    • योग
  • व्यक्तित्व
    • उत्तराखंड की महान विभूतियाँ
    • जीवनियाँ
  • सेवा
    • शिक्षा
    • सेवा प्रकल्प
    • स्वास्थ्य
  • नित्य प्रेरणा
    • कविता/कहानी
    • नवचार
    • पुस्तक परिचय
    • बागवानी
    • बाल पृष्ठ
  • गाँव की बात
    • परम्परा
    • प्रसिद्ध मेले
    • भाषा-बोली
  • करियर/स्वावलंबन
  • संपर्क करें
No Result
View All Result
  • होम
  • उत्तराखण्ड सम्वाद
  • देश
  • प्रदेश
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • ऊधम सिंह नगर
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी गढ़वाल
    • देहरादून
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • पंच परिवर्तन
    • कुटुंब प्रबोधन
    • सामाजिक समरसता
    • पर्यावरण
    • स्व का बोध
    • नागरिक कर्तव्य
  • विचार
    • अध्यात्म
    • आयुर्वेद
    • योग
  • व्यक्तित्व
    • उत्तराखंड की महान विभूतियाँ
    • जीवनियाँ
  • सेवा
    • शिक्षा
    • सेवा प्रकल्प
    • स्वास्थ्य
  • नित्य प्रेरणा
    • कविता/कहानी
    • नवचार
    • पुस्तक परिचय
    • बागवानी
    • बाल पृष्ठ
  • गाँव की बात
    • परम्परा
    • प्रसिद्ध मेले
    • भाषा-बोली
  • करियर/स्वावलंबन
  • संपर्क करें
No Result
View All Result
vskuttarakhand
No Result
View All Result
  • होम
  • उत्तराखण्ड सम्वाद
  • देश
  • प्रदेश
  • पंच परिवर्तन
  • विचार
  • व्यक्तित्व
  • सेवा
  • नित्य प्रेरणा
  • गाँव की बात
  • करियर/स्वावलंबन
  • संपर्क करें
होम व्यक्तित्व उत्तराखंड की महान विभूतियाँ

बद्रीदत्त पाण्डेय जी

in उत्तराखंड की महान विभूतियाँ, व्यक्तित्व
0
बद्रीदत्त पाण्डेय जी
0
SHARES
7
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

03 Jul 2025

बद्रीदत्त पाण्डेय जी का जीवन परिचय !

रत्नगर्भा उत्तरांखण्ड राज्य में कुमाऊं को प्राचीन समय से कूर्मांचल कहा जाता है। यहां भागीरथी के तट पर स्थित कनखल (हरिद्वार) में के प्रसिद्ध स्वाधीनता सेनानी, कूर्मांचल केसरी बद्रीदत्त पाण्डेय जी का जन्म 15 फरवरी, 1882 को हरिद्वार के प्रसिद्ध वैद्य श्री विनायक दत्त पांडेय के घर में हुआ था। अल्पावस्था में माता और पिता के देहांत के बाद इनका लालन-पालन बड़े भाई ने किया।

अल्मोड़ा में पढ़ते समय इन्होंने स्वामी विवेकानंद, महामना मदनमोहन मालवीय जैसे महान लोगों से अत्यधिक प्रभावित रहे। बड़े भाई की मृत्यु हो जाने से इन्हें शिक्षा अधूरी छोड़कर 1902 में सरगुजा राज्य (छोटा नागपुर) में नौकरी करनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने नैनीताल में अध्यापन तथा चकराता (देहरादून) की सैनिक कार्यशाला में भी काम किया। 1908 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी।

पत्रकारिता में रुचि होने से प्रयाग के ‘लीडर’ तथा देहरादून के ‘कॉस्मोपोलिटिन’ पत्रों में काम करने के बाद 1913 में उन्होंने ‘अल्मोड़ा अखबार’ निकाला। जनता की कठिनाई तथा शासन के अत्याचारों के बारे में विस्तार से छापने के कारण कुछ ही दिन में यह पत्र लोकप्रिय हो गया। इससे सरकारी अधिकारी बौखला उठे। उन्होंने इनसे जमानत के नाम पर एक बड़ी राशि जमा करने को कहा। बद्रीदत्त जी ने वह राशि नहीं दी और समाचार पत्र बन्द हो गया।

1918 की विजयादशमी से बद्रीदत्त जी ने ‘शक्ति’ नामक एक नया पत्र प्रारम्भ कर दिया। कुमाऊं के स्वाधीनता तथा समाज सुधार आंदोलनों में इस पत्र तथा बद्रीदत्त जी का बहुत बड़ा योगदान है। 1916 में उन्होंने बद्रीदत्त पाण्डेय जी ने ‘कुमाऊं परिषद’ नामक संस्था बनाई। सन् 1920 में कुमाऊँ परिषद् के ऐतिहासिक काशीपुर अधिवेशन में पहाड़ में प्रचलित कुली उतार, कुली बेगार व कुली बर्दायश न देने जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने के प्रस्ताव पारित किये गये।

‘कुली बेगार प्रथा’ के विरोध में 1921 की मकर संक्रांति पर 40,000 लोग बागेश्वर में एकत्र हुए। बद्रीदत्त पाण्डे जी, हरगोविन्द पन्त जी और चिरंजीलाल शाह जी आदि नेता काफी दिनों से प्रवास कर इसकी तैयारी कर रहे थे। सभा के बीच अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर डाइविल ने सैकड़ों सिपाहियों के साथ वहां आकर सबको तुरन्त चले जाने को कहा; पर बद्रीदत्त जी ने यह आदेश ठुकरा दिया। उनकी प्रेरणा से सब लोगों ने सरयू का जल हाथ में लेकर बाघनाथ भगवान के सम्मुख इस कुप्रथा को न मानने की शपथ ली और इसकी बहियां फाड़कर नदी में फेंक दीं।

इस अहिंसक क्रांति ने बद्रीदत्त जी को जनता की आंखों का तारा बना दिया। लोगों ने उन्हें ‘कूर्मांचल केसरी’ की उपाधि तथा दो स्वर्ण पदक प्रदान किये। 1962 में चीन से युद्ध के समय उन्होंने वे पदक राष्ट्रीय सुरक्षा कोष में दे दिये। बद्रीदत्त जी भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के सक्रिय नेता होने के कारण पाँच बार जेल गये। वे सर्वप्रथम 1921 में पकड़े गये और बरेली जेल भेज दिए गये। दूसरी बार जून 1930 में पकड़े गये और एक वर्ष छह माह की सजा हुई। 10 जून, 1932 में तीसरी बार पकड़े गये और एक वर्ष की कैद हुई। सन् 1940 में छः माह व सन् 1942 में दो वर्ष की कैद हुई।

सन् 1926 में महात्मा गांधी जी कुमाऊँ आये। बद्रीदत्त जी उनके साथ बागेश्वर गये। वहाँ आयोजित सभा में बद्रीदत्त पाण्डे ने एक अत्यन्त हृदयस्पर्शी भाषण दिया, जिसका मुख्य अंश इस प्रकार है- “इसी डाक बंगले से नौकरशाही प्रजा के ऊपर अन्याय करती थी। आज अन्याय की जगह न्याय के देवता यहाँ पधारे हैं। इसमें आज स्वराज्य की मुहर लग गयी है।”

ब्रिटिश काल में कुमाऊँ एवं ब्रिटिश गढ़वाल में बाल विवाह जैसी कुप्रथाएँ व्याप्त थीं, जिन्हें यहाँ सामाजिक कलंक कहा जाता था। बद्रीदत्त पाण्डे जी ने इस कलंक को समाप्त करने में सर्वाधिक कार्य किया। स्वाधीनता से पूर्व तथा बाद में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा तथा 1955 में संसद के सदस्य बने।

बद्रीदत्त जी के जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आये। बरेली कारावास के समय इनका पुत्र तारकनाथ जन्माष्टमी के दिन वाराणसी में नहाते समय नदी में डूब गया। वह प्रयाग से से बी.एस-सी कर रहा था। यह सुनकर मुंबई में रह रही इनकी पुत्री जयन्ती ने आत्मदाह कर लिया। इनकी धर्मपत्नी भी बेहोश हो गयीं; पर बद्रीदत्त जी ने संयम नहीं खोया। दुख को भुलाने के लिए उन्होंने ‘कुमाऊँ का इतिहास’ नामक पुस्तक की रचना प्रारम्भ कर दी। यह महत्वपूर्ण ग्रन्थ आज कुमाऊँ के इतिहास पर शोधकार्य कर रहे शोधकर्ताओं के लिए आधारभूत एवं प्रेरणा-स्रोत तथा जनसाधारण के लिए कुमाऊँ का इतिहास जानने का प्रमुख साधन है। यह ग्रन्थ जिस दुखदायी स्थिति में लिखा गया और उत्तराखण्ड के शोध कर्ताओं के लिए जिस मात्रा में वरदान सिद्ध हो रहा है, उस पर विचार कर यह अपने आप में एक महान उपलब्धि है।

बद्रीदत्त पाण्डे जी अपनी वृद्धावस्था में भी स्वावलम्बी रहे और उनकी स्मरण शक्ति तीव्र बनी रही। पाण्डे जी के त्यागपूर्ण तथा तपस्यामय जीवन में उनकी धर्मपत्नी अन्पूर्णा देवी जी का प्रमुख हाथ था। उन्होंने अपने पति के साथ अनेक आर्थिक व मानसिक कष्ट झेले व सफलतापूर्वक इनका सामना किया। 13 फरवरी, 1965 को इस महान स्वतन्त्रता सेनानी का स्वर्गवास हो गया। उनका दाह संस्कार बागेश्वर में सरयू के तट पर किया गया, जहां से उन्होंने देश की स्वाधीनता और कुली बेगार प्रथा के विरोध में अहिंसक क्रांति का शंखनाद किया था।

बद्रीदत्त पाण्डे जी एक महान क्रान्तिकारी, स्वतन्त्रता संग्राम के वीर योद्धा, सुलझे हुए उच्च कोटि के पत्रकार, निर्भीक लोक सभा सदस्य, महान समाज सुधारक, निश्चल और निष्कपट व्यक्ति थे। बद्रीदत्त पाण्डे जी के प्रभाव से साधारण लोग भी काँग्रेस के सिपाही बन गये। उनका सम्मान अखिल भारतीय नेता भी करते थे। किसी के आगे उन्होंने झुकना नहीं सीखा था। उन्होंने कुमाऊँ-गढ़वाल के अनेक दौरे कर वहाँ राष्ट्रीय चेतना की ज्योति जलाई। बद्रीदत्त केवल एक महान नेता ही नहीं, बल्कि एक सशक्त लेखक, स्पष्ट वक्ता व कुशल पत्रकार भी थे। उन्होंने देश के लिए हमेशा कष्ट झेले, सामाजिक व राजनीतिक क्रान्ति की। कुली-उतार, बेगार एवं बर्दायश तथा नायक प्रथा, जो कुमाऊँ के समाज को कलंकित कर रहे थे, पाण्डे जी ने उन्हें समाप्त करवाया। कहा जाता है कि पं. गोविन्दबल्लभ पन्त पाण्डे जी को अपना राजनैतिक गुरु मानते थे और उनके उग्र राष्ट्रीय विचारों को देखकर अंग्रेज उन्हें राजनैतिक जानवर कहते थे।

Previous Post

पंडित नैन सिंह रावत जी

Next Post

जनरल बिपिन रावत जी

admin

admin

Next Post
जनरल बिपिन रावत जी

जनरल बिपिन रावत जी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताज़ा समाचार

देहरादून: हरिपुर कालसी में बन रहा उत्तराखंड का पहला जमुना घाट, मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने किया निरीक्षण

देहरादून: हरिपुर कालसी में बन रहा उत्तराखंड का पहला जमुना घाट, मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने किया निरीक्षण

by admin
July 22, 2026
0

‘हिन्दू साम्राज्य दिवस’ पर भव्य संगोष्ठी का आयोजन !

‘हिन्दू साम्राज्य दिवस’ पर भव्य संगोष्ठी का आयोजन !

by admin
July 10, 2026
0

हरिद्वार में संस्कार भारती का क्षेत्रीय प्रशिक्षण वर्ग संपन्न !

हरिद्वार में संस्कार भारती का क्षेत्रीय प्रशिक्षण वर्ग संपन्न !

by admin
July 6, 2026
0

कर्मठ कर्मयोगी स्व. धरमवीर जी को सादर श्रद्धांजलि !

कर्मठ कर्मयोगी स्व. धरमवीर जी को सादर श्रद्धांजलि !

by admin
July 10, 2026
0

विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्ग दर्शक मण्डल की हरिद्वार में बैठक !

विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्ग दर्शक मण्डल की हरिद्वार में बैठक !

by admin
June 19, 2026
0

अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के नए प्रदेश कार्यालय का भव्य उद्घाटन !

अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के नए प्रदेश कार्यालय का भव्य उद्घाटन !

by admin
June 17, 2026
0

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पश्चिम क्षेत्र क्षेत्र स्तरीय 20 दिवसीय कार्यकर्ता विकास वर्ग प्रथम (सामान्य) संपन्न हुआ !

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पश्चिम क्षेत्र क्षेत्र स्तरीय 20 दिवसीय कार्यकर्ता विकास वर्ग प्रथम (सामान्य) संपन्न हुआ !

by admin
June 15, 2026
0

और लोड करें
विश्व संवाद केंद्र लोगो

यह न्यूज़ वेबसाइट एक विश्वसनीय और
अधतित समाचार स्रोत है जो देश-दुनिया
की ताज़ा ख़बरों, राजनीति, खेल,
मनोरंजन, व्यापार, और तकनीकी जगत
से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी हिंदी
भाषा में उपलब्ध कराती है।

गाँव की बात

पहाड़ का लोकसंगीत

पहाड़ का लोकसंगीत

by admin
August 4, 2025
0

हरेला: सावन में प्रकृति पूजन का पर्व

हरेला: सावन में प्रकृति पूजन का पर्व

by admin
July 16, 2025
0

ट्रेंडिंग न्यूज़

कृपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन उपाख्य सुदर्शन जी

by admin
May 30, 2025
0

प्रोफ़ेसर राजेंद्र सिंह उपाख्य रज्जू भैया

by admin
May 30, 2025
0

संपर्क करे

  • विश्व संवाद केंद्र ‘नारायण मुनि भवन’ 16-ए, राजपुर रोड, देहरादून – 248001 उत्तराखण्ड
  • +91-9997712059
  • 📧 info@vskuttarakhand.com
  • About
  • Privacy & Policy
  • Contact
  • Terms and Conditions

© 2026 All rights reserved ©️ 2025 News. Vishwa Samvad Kendra, Uttarakhand | Designed by Digifame India

No Result
View All Result
  • होम
  • उत्तराखण्ड सम्वाद
  • देश
  • प्रदेश
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • ऊधम सिंह नगर
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी गढ़वाल
    • देहरादून
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • पंच परिवर्तन
    • कुटुंब प्रबोधन
    • सामाजिक समरसता
    • पर्यावरण
    • स्व का बोध
    • नागरिक कर्तव्य
  • विचार
    • अध्यात्म
    • आयुर्वेद
    • योग
  • व्यक्तित्व
    • उत्तराखंड की महान विभूतियाँ
    • जीवनियाँ
  • सेवा
    • शिक्षा
    • सेवा प्रकल्प
    • स्वास्थ्य
  • नित्य प्रेरणा
    • कविता/कहानी
    • नवचार
    • पुस्तक परिचय
    • बागवानी
    • बाल पृष्ठ
  • गाँव की बात
    • परम्परा
    • प्रसिद्ध मेले
    • भाषा-बोली
  • करियर/स्वावलंबन
  • संपर्क करें

© 2026 All rights reserved ©️ 2025 News. Vishwa Samvad Kendra, Uttarakhand | Designed by Digifame India