ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः | सर्वे भद्रान्नि पश्यन्तु, माँ कश्चिद्-दुःख-भाग-भवेत् ||     ॐ शांतिः शांतिः शांतिः                                                                   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष (विक्रम संवत 1982–2082)                                                                  
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सेवा, सद्भावना और संवेदना का संगम : माधव सेवा विश्राम सदन, ऋषिकेश

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30 Jul 2025

सेवा, सद्भावना और संवेदना का संगम : माधव सेवा विश्राम सदन, ऋषिकेश

ऋषिकेश की पावन धरती, जहाँ योग, अध्यात्म और मानव सेवा की नित्य सजीव गाथा बहती है, वहीं अब एक और सेवा का दीप प्रज्वलित हुआ है। ‘माधव सेवा विश्राम सदन’ के रूप में। जहां गंगा की कलकल धारा योग और अध्यात्म का संदेश लेकर प्रवाहित होती है। वहीं उसी धरती पर ‘माधव सेवा विश्राम सदन’ सेवा, सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना का एक भव्य प्रतीक बनकर उभरा है। भाऊराव देवरस सेवा न्यास द्वारा निर्मित यह भवन न केवल एक विश्राम स्थल है, बल्कि यह भारतीय जीवन मूल्यों, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का मूर्त रूप है। गंगा तट से मात्र 300 मीटर की दूरी पर स्थित यह भवन न केवल एक सुंदर स्थापत्य कृति है, अपितु यह भारतीय सेवा परंपरा का भी गौरवपूर्ण प्रतीक बनकर उभरा है।
~
3 जुलाई 2024 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत द्वारा राष्ट्र को समर्पित यह भवन, भाऊ राव देवरस सेवा न्यास की कल्पना और प्रतिबद्धता का साकार रूप है। यह लोकार्पण महज एक औपचारिक उ‌द्घाटन नहीं, बल्कि एक आदर्श सामाजिक दर्शन की उद्घोषणा भी था, जो यह बताता है कि समाज के सबसे जरूरतमंद वर्ग के लिए समर्पण और सेवा ही सच्ची आध्यात्मिकता का मूल है। इस अद्वितीय सेवा केन्द्र का निर्माण पारंपरिक भारतीय स्थापत्य कला के अनुरूप किया गया है, जो इसकी गरिमा और आध्यात्मिकता को और अधिक प्रखर बनाता है।

सेवा का संवेदनशील विस्तार

पारंपरिक भारतीय स्थापत्य कला की छाया में निर्मित यह भवन अपने आप में एक स्थापत्य चमत्कार है। एम्स ऋषिकेश में उपचार हेतु आने वाले रोगियों, उनके परिजनों और सहायकों के लिए यह विश्राम सदन किसी वरदान से कम नहीं है। यहाँ 430 लोगों के ठहरने की सुविधा, 55 व 75 रुपये के सामूहिक कक्ष, तथा नाश्ता मात्र 20 रुपये व भोजन 35 रुपये में उपलब्ध कराकर सेवा को केवल भावना नहीं, व्यावहारिक रूप में साकार किया गया है। यह व्यवस्था सेवा को ही धर्म मानने वाले उस विचार को सामने लाती है, जिसमें “नर सेवा ही नारायण सेवा” का भाव समाहित है। पारंपरिक भारतीय स्थापत्य की झलक इस भवन की दीवारों से लेकर गलियारों तक दिखती है। लेकिन इसकी आत्मा इसकी सेवाओं में बसती है। योग साधना, सत्संग, बाल क्रीड़ा क्षेत्र, पुस्तकालय, टीवी लाउंज और सामुदायिक भोजन कक्ष ये सभी सुविधाएं इस भवन को केवल विश्राम स्थल नहीं, अपितु एक जीवंत सांस्कृतिक व मानवीय केन्द्र बनाती हैं।

केवल विश्राम नहीं एक संस्कार स्थल

माधव सेवा विश्राम सदन एक ऐसा स्थल है, जो केवल भौतिक विश्राम की सुविधा नहीं देता, बल्कि मानसिक और आत्मिक विश्राम की भी व्यवस्था करता है। योग साधना, सत्संग, पुस्तकालय, टीवी लाउंज तथा बच्चों के खेलने की जगह, ये सभी सुविधाएं दर्शाती हैं कि यह भवन सेवा और संवेदना का जीवंत केंद्र है। सामूहिक भोजन की व्यवस्था जहां सामुदायिक जीवन के संस्कार देती है।

वहीं फिजियोथेरेपी की न्यूनतम दरों पर शुरुआत, चिकित्सा सेवा के प्रति इस संस्था की गंभीर प्रतिबद्धता को प्रकट करती है। भोजन कक्ष में 100 लोग एक साथ भोजन कर सकते हैं, यह सामाजिक सौहार्द का अद्भुत उदाहरण है। इस भवन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सोच है। यह उन लोगों के लिए निर्मित है जो एम्स ऋषिकेश जैसे बड़े चिकित्सालय में उपचार के लिए आते हैं, परन्तु आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक कारणों से ठहरने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं पा पाते। लगभग 430 लोगों के एक साथ ठहरने की व्यवस्था, पैदल दूरी पर एम्स की उपलब्धता और न्यूनतम दरों पर सुविधाएं, ये सभी इसे विशिष्ट बनाते हैं।

सुरक्षा और समावेशिता का उदाहरण

विश्राम सदन की वास्तुकला पारंपरिक भारतीय शैली को आत्मसात करती है, जो न केवल इसकी सुंदरता को बढ़ाती है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना को भी प्रतिध्वनित करती है। माधव सेवा विश्राम

सदन में केवल सुविधा ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और समावेशिता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। जहां एक ओर इस भवन की आत्मा भारतीय परंपराओं से जुड़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर इसका ढांचा आधुनिक सुविधाओं से लैस है। दिव्यांगों के लिए अलग से सुविधायुक्त शौचालय, अग्निशमन प्रणाली, जल संचयन की व्यवस्था और लिफ्ट जैसी सुविधाएं दर्शाती हैं कि यह सेवा केंद्र सभी वर्गों और जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्मित किया गया है। यह एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत करता है, जिसे देश भर में दोहराया जाना चाहिए।

प्रेरणा का स्रोत बनता एक सेवा धाम

आज जब समाज में स्वार्थ और सुविधा की होड़ है, ऐसे समय में माधव सेवा विश्राम सदन जैसे प्रकल्प एक नई आशा की किरण बनकर सामने आते हैं। यह भवन केवल ईंट और पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि यह सेवा, सहयोग और सद्भावना की जीवंत प्रतिमा है। यह प्रकल्प न केवल ऋषिकेश की पहचान को वैश्विक मंच पर और भी उज्ज्वल करता है, बल्कि यह भावी पीढ़ियों को भी प्रेरित करता है कि सेवा ही जीवन का सर्वोच्च धर्म है। माधय सेवा विश्राम सदन, सचमुच में एक ‘सेवा तीर्थ’ है, जहाँ हर आगंतुक को केवल सुविधा ही नहीं, अपितु अपनापन और आत्मीयता का अनुभव होता है। भारत की सांस्कृतिक परंपरा में सेवा को परम धर्म माना गया है। माधव सेवा विश्राम सदन, ऋषिकेश में इस धर्म का अनुपालन अत्यंत श्रद्धा, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ किया जा रहा है। यह भवन एक सामाजिक आंदोलन है, जो समाज को जोड़ने, सहारा देने और आत्मिक बल देने का कार्य कर रहा है।

आज की भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली में ऐसे सेवा केन्द्रों की आवश्यकता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में माधव सेवा विश्राम सदन केवल रोगियों के तिमारदारों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत है, एक ऐसा केन्द्र, जहाँ सेवा संस्कार बन जाती है, और सद्भावना उसका आधार। माधव सेवा विश्राम सदन एक ऐसा प्रकल्प है, जो न केवल वास्तुशिल्पीय सौंदर्य का उदाहरण है, बल्कि भारतीय जीवन दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का सजीव प्रतीक भी है। यह भवन आज नहीं, आने वाले कई वर्षों तक सेवा, सहानुभूति और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का प्रेरणास्रोत बना रहेगा। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि ऋषिकेश की यह भूमि अब केवल योग की नगरी नहीं रही। बल्कि सेवा के नए सूरज का उदय भी यहीं हुआ है।

यह अद्भुत प्रयास देशभर के सेवा संगठनों और सामाजिक संस्थानों के लिए एक मार्गदर्शक बनकर उभरा है। जब सेवा, वास्तु, तकनीक और संवेदना एक साथ मिलते हैं, तो ‘माधव सेवा विश्राम सदन’ जैसे उदाहरण सामने आते हैं, जो न केवल आज की जरूरतों का उत्तर हैं, बल्कि भविष्य की प्रेरणा भी हैं।

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