10 Jul 2025
बग्वाल, देवीधुरा मेला
लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करने वाला पौराणिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल देवीधुरा अपने अनूठे तरह के पाषाण युद्ध के लिये पूरे भारत प्रसिद्ध है। स्थानीय भाषा में इस युद्ध को ‘बग्वाल’ कहा जाता है। उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को समेटे देवीधुरा का ‘बग्वाल मेला’ पौराणिक लोक पर्व है जिसमें आस्था और संघर्ष का अद्वितीय मेल देखने को मिलता है। बग्वाल मेला, हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा (रक्षा‑बन्धन) के दिन लोहाघाट से लगभग 45 किमी दूर ज़िला चम्पावत के अंतर्गत देवीधुरा गांव में स्थित माँ बाराही देवी का मंदिर परिसर में मनाया जाता है । यह बग्वाल, कुमाऊँ की संस्कृति का अभिन्न अंग है।
देवीधुरा का यह विशेष मेला, जो कुमाऊं, नेपाल और यहां तक कि अन्य स्थानों से लोगों को आकर्षित करता है । प्राचीन काल से चली आ रही यहाँ की एक स्थापित परंपरा के अनुसार यहाँ के स्थानीय लोग चार दलों में विभाजित होकर (जिन्हे खाम कहा जाता है, क्रमशः चम्याल खाम, बालिक खाम, लमगडिया खाम, और गढ़वाल खाम) दो समूहों में बंट जाते हैं और इसके बाद होता है एक युद्ध जो पत्थरों को अस्त्र के रूप में उपयोग करते हुये खेला जाता है और लकड़ी की बड़ी ढालों की मदद से खुद को बचाने की कोशिश करते हैं। हालाँकि अधिकांश लोग अब फल और फूल का प्रयोग करते हैं ।
ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के पूर्व सम्पूर्ण पृथ्वी जलमग्न थी तब प्रजापति ने वाराह बनकर उसका दाँतो से उद्धार किया उस स्थिति में अब दृष्यमान भूमाता दंताग्र भाग में समाविष्ट अंगुष्ट प्रादेश मात्र परिमित थी। ‘‘ओ पृथ्वी! तुम क्यों छिप रही हो?’’ ऐसा कहकर इसके पतिरूप मही वाराह ने उसे जल मे मघ्य से अपने दन्ताग्र भाग में उपर उठा लिया। यही सृष्टि माँ वाराही हैं। देवीधुरा में सिद्धपीठ माँ वाराही के मंदिर परिसर के आस पास भी पर्यटकीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अन्य स्थलों में खोलीगाँड, दुर्वाचौड, गुफ़ा के अंदर बाराही शक्ति पीठ का दर्शन, परिसर में ही स्थित संस्कृत महाविद्यालय परिसर, शंखचक्र घंटाधर गुफ़ा, भीमशिला और गवौरी प्रवेश द्वार आदि प्रमुख हैं।
देवीधुरा सुंदर देशी वनस्पतियों और जीवों से घिरे ऊंचे देवदार और ओक के पेड़ों के बीच स्थित है। धार्मिक आस्था के साथ ही इस स्थल से लगभग 300 कि.मी. लम्बी हिम श्रंखलाओं के भव्य दृश्य का आनंद लिया जा सकता है। ट्रैकिंग के लिए यह एक अद्भुत जगह है। प्रसिद्ध शिकारी जिम कॉर्बेट की कहानी ‘टेम्पल टाइगर’ देवीधुरा के मंदिरों से जुड़ी है।












