28 May 2026
एक विवाद…
हमारा व्यवहार — एक सकारात्मक दृष्टिकोण
आजकल सोशल मीडिया पर एक विषय काफी चर्चा में है कि “उत्तराखंड मत जाओ”, “वहां बाहरी लोगों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता”, “HR नंबर की गाड़ियों को देखकर चालान किए जाते हैं” आदि।
इस विषय पर मेरा व्यक्तिगत मानना थोड़ा अलग है !
किसी भी स्थान के लोग सामान्यतः तभी नाराज़ होते हैं जब पर्यटक या बाहरी लोग वहां की संस्कृति, शांति और नियमों का सम्मान नहीं करते। केवल उत्तराखण्ड ही नहीं, देश के हर राज्य में स्थानीय लोग अपने वातावरण और व्यवस्था को सुरक्षित रखना चाहते हैं। दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल या किसी भी प्रदेश में बाहर की गाड़ियों को पुलिस अधिक ध्यान से रोकती है, यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है।
पिछले कुछ वर्षों में पर्वतीय क्षेत्रों में तीर्थाटन के साथ पर्यटन बहुत बढ़ा है। सड़कें बेहतर हुई हैं, लोगों के पास साधन , पैसा और वाहन बढ़े हैं, तो स्वाभाविक रूप से भीड़ भी बढ़ी है। लेकिन पहाड़ों की भौगोलिक सीमाएं होती हैं — वहां सड़कें सीमित चौड़ाई की होती हैं, वातावरण शांत होता है और प्रकृति बहुत संवेदनशील होती है। ऐसे में जब कुछ लोग तेज रफ्तार, ऊंची आवाज में संगीत, शराब या हुक्के के खुले प्रदर्शन, गंदगी और हुड़दंग जैसी गतिविधियां करते हैं, तो स्थानीय लोगों को असहजता होना स्वाभाविक है।
यह बात केवल उत्तराखण्ड पर लागू नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति किसी भी गांव, कस्बे या शांत क्षेत्र में जाकर ऐसा व्यवहार करे, तो वहां के लोगों को भी आपत्ति होगी। इसलिए समस्या किसी राज्य या समुदाय की नहीं, बल्कि व्यवहार की है।
उत्तराखण्ड देवभूमि है, वहां की असली सुंदरता उसकी शांति, प्रकृति, मां गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों, हिमनदों, नेशनल पार्क संरक्षित झरनों, मंदिरों , तीर्थों,और सरल जीवनशैली में है। यदि हम वहां जाएं तो प्रकृति का आनंद लें, पहाड़ों की संस्कृति को समझें, योग-ध्यान करें, स्थानीय लोगों का सम्मान करें और स्वच्छता बनाए रखें — तब यात्रा वास्तव में यादगार बनती है।
कुछ लोग यह भी कहते हैं कि “अगर पर्यटक नहीं जाएंगे तो पहाड़ों के लोग भूखे मर जाएंगे।” यह सोच ओर वक्तव्य निंदनीय है जिसे कभी उचित नहीं कहा जाएगा । उत्तराखण्ड के लोग मेहनती, सरल और आत्मसम्मानी होते हैं। पर्यटन उनकी अर्थव्यवस्था का एक हिस्सा अवश्य है, लेकिन उनका जीवन केवल उसी पर निर्भर नहीं है। साथ ही, वहां कई व्यवसाय बाहरी लोगों द्वारा भी संचालित किए जा रहे हैं।
मैंने तो हमेशा यह महसूस किया है उत्तराखण्ड पहाड़ों की यात्रा में कि यहां के निवासी बहुत सम्मान करते हैं उन सब का चाहे हम हरियाणा, पंजाब, बंगाल कहीं से हों,जो इस भारत की ओर उत्तराखण्ड की मर्यादा का सम्मान करते हैं भाषाएं बोली बोलने के तरीके अलग हो सकते हैं लेकिन हमें किसी के व्यवहार से कब ठेस पहुंचती है यह तो जरूर देखना चाहिए।
हां, यह भी सही है कि कहीं-कहीं स्थानीय युवाओं की प्रतिक्रिया या गुस्सा गलत तरीके से सामने आ जाता है। ऐसी स्थिति में कानून को अपना काम करने देना चाहिए, हाथापाई या विवाद किसी भी पक्ष के लिए सही नहीं है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे संदेशों और बहकावे से बचें, जिनका उद्देश्य समाज में दूरी और अविश्वास बढ़ाना हो। कुछ असामाजिक तत्व छोटी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत कर लोगों के बीच खाई पैदा करने का प्रयास करते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि देश के अलग-अलग राज्यों के लोग वर्षों से एक-दूसरे के साथ प्रेम, सहयोग और भाईचारे से रहते आए हैं।
हरियाणा, उत्तराखण्ड, हिमाचल, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश या देश का कोई भी क्षेत्र — हम सब एक ही भारत माता की संतान हैं। हमारी विविधता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। पर्वतों से मैदानों तक, गांवों से शहरों तक — भारत की पहचान आपसी सद्भाव, सम्मान और एकता से ही बनी है।
इसलिए किसी भी एक घटना या वायरल संदेश के आधार पर पूरे समाज या प्रदेश के प्रति गलत धारणा नहीं बनानी चाहिए और न ही बिना सत्य जाने ऐसी बातों को आगे साझा करना चाहिए। यदि हम संयम, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच के साथ विषयों को समझेंगे, तभी समाज में विश्वास और भारत कि एकता सुदृढ़ रहेगी।
हम सबको यह समझना होगा कि पर्यटन केवल घूमना नहीं, बल्कि किसी स्थान की संस्कृति और प्रकृति का सम्मान करना भी है।
यदि हम अच्छे व्यवहार, संयम और सम्मान के साथ जाएं, तो उत्तराखण्ड, हिमाचल, लेह-लद्दाख या देश का कोई भी पहाड़ी क्षेत्र हमें खुले दिल से अपनाता है।
मैं स्वयं कई बार उत्तराखण्ड और हिमाचल गया हूँ और हमेशा वहां के लोगों का अपनापन, सादगी और सहयोग ही अनुभव किया है। पहाड़ों की सबसे बड़ी खूबी उनकी शांति और इंसानियत है और उसे बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
आइए, पर्यटन को आनन्द, सम्मान और सद्भाव का माध्यम बनाएं।
जय हिंद, जय भारत ! 🇮🇳
-संदीप बराला,हरियाणा












