29 Mar 2026
हिंदू नववर्ष चैत्र प्रतिपदा पर देहरादून महानगर दक्षिण का भव्य पथ संचलन एवं संगम।
हिंदू नववर्ष चैत्र प्रतिपदा के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के देहरादून दक्षिण महानगर द्वारा भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महानगर के चार नगरों शिवाजी नगर, महाराणा प्रताप नगर, प्रेम नगर एवं मानक सिद्ध नगर के युवा, तरुण एवं प्रौढ़ आयु वर्ग के स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक सहभाग किया।
कार्यक्रम में स्वयंसेवकों द्वारा अमृत वचन एवं एकल गीत की प्रभावशाली प्रस्तुति की गई।
इस अवसर पर बौद्धिक कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक उत्तराखण्ड डॉ. शैलेंद्र जी ने सभी को हिंदू नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएंदीं और हिंदू कालगणना के वैज्ञानिक महत्व को बताया। आपने कहा कि “हिंदू कालगणना ब्रह्मांडीय पैमाने पर आधारित है और यह चंद्र-सौर-नक्षत्र तीनों पर आधारित एक अत्यंत सूक्ष्म एवं जटिल प्रणाली है। ‘सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग’ युगों की अवधारणा कालगणना की विशालता को दर्शाता है। चैत्र प्रतिपदा का यह पावन दिन अनेक ऐतिहासिक एवं दिव्य घटनाओं का साक्षी है इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की, यह दिन सतयुग का आरंभ, भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक, धर्मराज युधिष्ठिर का राजतिलक,भगवान झूलेलाल जी का अवतरण के साथ ही परम पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के जन्म दिवस का पावन दिन है।

डॉ. शैलेंद्र ने परम पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के असाधारण जीवन का स्मरण कराते हुए बताया कि उन्होंने परतंत्र भारत में अत्यंत विषम परिस्थितियों के बीच कोलकाता से डॉक्टर की डिग्री प्राप्त की। यह उपाधि उनके लिए व्यक्तिगत समृद्धि और सुखी पारिवारिक जीवन का द्वार खोल सकती थी किंतु उन्होंने इस सुअवसर को राष्ट्र की वेदी पर सहर्ष समर्पित कर दिया। आजीवन अविवाहित रहते हुए, व्यक्तिगत एवं पारिवारिक आर्थिक अभावों की परवाह किए बिना, उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र-सेवा एवं समाज-जागरण को अर्पित कर दिया। डॉ. हेडगेवार जी ने गली-गली, नगर-नगर, प्रांत-प्रांत भ्रमण करते हुए हिंदू समाज को संगठित करने में दिन-रात एक कर दिया था। उन्होंने नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की यह उनके जीवन का सबसे बड़ा राष्ट्र-यज्ञ था। संघ के विस्तार हेतु उन्होंने भारतवर्ष के कोने-कोने में व्यापक प्रवास किया, अनगिनत कष्ट एवं अपमान भी सहे, किंतु राष्ट्र-कार्य से कभी विचलित नहीं हुए। उनका सम्पूर्ण जीवन इस सिद्धांत का जीवंत प्रमाण था कि व्यक्तिगत सुख-सुविधा से ऊपर उठकर राष्ट्र एवं समाज की सेवा ही सच्ची साधना है।
डॉ. शैलेंद्र ने उपस्थित स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे इस त्याग, तपस्या और समर्पण की अनुपम गाथा से प्रेरणा लें और अपने-अपने क्षेत्र में संघ कार्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का संकल्प लें।

चारों नगरों से निकले पथ संचलन का संगम अन्ना हजारे चौक, मेहुवाला माफी पर हुआ, जहाँ से सामूहिक संचलन राजकीय इंटर कॉलेज, मेहुवाला पहुँचा। मुख्य कार्यक्रम स्थल पर स्वयंसेवकों के परिवारजनों सहित समाज के प्रतिष्ठित नागरिक और बड़ी संख्या में आम जनमानस ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में देहरादून महानगर दक्षिण के संघचालक कैलाश मैलाना जी, प्रान्त व्यवस्था प्रमुख नीरज मित्तल जी, महानगर कार्यवाह सतेंद्र जी, महानगर प्रचार प्रमुख मनीष बागड़ी जी सहित संघ के अनेक जेष्ठ दायित्व वान स्वयंसेवक उपस्थित रहे।












