ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः | सर्वे भद्रान्नि पश्यन्तु, माँ कश्चिद्-दुःख-भाग-भवेत् ||     ॐ शांतिः शांतिः शांतिः                                                                   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष (विक्रम संवत 1982–2082)                                                                  
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राम मंदिर बन गया, अब राष्ट्र मंदिर का निर्माण करना है – डॉ. मोहन भागवत जी

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राम मंदिर बन गया, अब राष्ट्र मंदिर का निर्माण करना है – डॉ. मोहन भागवत जी
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01 Dec 2025

राम मंदिर बन गया, अब राष्ट्र मंदिर का निर्माण करना है – डॉ. मोहन भागवत जी

पुणे, 01 दिसंबर, 2025। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कोथरूड के यशवंतराव चव्हाण थिएटर में आदित्य प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित कृतज्ञता समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि विश्व कल्याण की पताका फहराते हुए श्रीराम मंदिर बन गया है। अब पहले से भी अधिक भव्य, शक्तिशाली और सुंदर राष्ट्र मंदिर का निर्माण करना है।

इस अवसर पर कांची कामकोटि पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती जी, आदित्य प्रतिष्ठान के अध्यक्ष शंकर अभ्यंकर, अपर्णा अभ्यंकर उपस्थित थे।

कृतज्ञता पुरस्कार को स्वीकार करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि अपने समाज के लिए काम करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में आभार या अहंकार की कोई भावना नहीं है। “संघ को पूरे समाज का संगठन अपेक्षित है क्योंकि समाज संगठित होगा, तभी राष्ट्र वैभव संपन्न बनेगा। राष्ट्र बल संपन्न होगा, तभी विश्व में सुख व शांति होगी। इसमें भी हम यह नहीं मानते कि संघ ही देश का भला करेगा, बल्कि देश तभी खड़ा होगा, जब समाज खड़ा होगा।” उन्होंने कहा कि कठिन समय में समाज ने संघ का साथ दिया, इसी कारण संघ बड़ा हुआ।

सरसंघचालक जी ने कहा कि स्वयंसेवकों ने अपने प्राण देकर संघ का निर्माण किया। अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में, खुद-पसीना एक कर और अपना पूरा जीवन मिट्टी में मिलाकर संघ का वटवृक्ष खड़ा करने वाले डॉ. हेडगेवार, राष्ट्र के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाले प्रचारक, ग्रामीण और दूरदराज के हिस्सों में जान जोखिम में डालकर काम करने वाले गृहस्थी कार्यकर्ता और अक्षरशः जान की बाजी लगाकर सचमुच संघ का निर्माण करने वाले स्वयंसेवकों के प्रति यह कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। कष्ट और उपेक्षा का सामना करने पर भी स्वयंसेवक मुस्कुराते हुए काम करता है। उन्होंने कहा कि विश्व कल्याण की भावना रखने वाली यह संघ शक्ति कभी भी समाज को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगी।

शंकर अभ्यंकर ने कहा, “आक्रमणों के कारण विश्व की कई सभ्यताएं नष्ट हो गईं। लेकिन पूरे विश्व को एक परिवार मानने वाली भारत की हिन्दू सभ्यता आज भी जीवंत है। भारत पर भौतिक आक्रमणों के साथ-साथ अंदरूनी आक्रमण भी हुए। अंग्रेजों ने भारत के ‘स्व’ को तोड़ने का प्रयास किया।”

शंकराचार्य जी ने कहा कि भारत की सनातन सभ्यता विश्व की भलाई के लिए मानवता की मार्गदर्शक है। हिन्दू सभ्यता ही है जो सबका स्वीकार करती है। “कई भाषाओं, परंपराओं और क्षेत्रों के होने के बाद भी भारत में आधुनिक लोकतंत्र सफल हुआ है। क्योंकि प्रजातंत्र सनातन धर्म का भाव ही है। आज लोकतंत्र को मज़बूत करने और अच्छे लोगों को बल देने की आवश्यकता है।”

कार्यक्रम में वैश्विक संत भारती महाविष्णु मंदिर की आधारशिला का अनावरण, ‘भारतीय उपासना’ नामक कोष के तीसरे संस्करण का विमोचन और जितेंद्र अभ्यंकर कृत ‘पंढरिश’ नामक ऑडियो का विमोचन हुआ। कार्यक्रम का आरंभ रामायण पर आधारित संगीत नाटिका ‘निरंतर’ से हुआ। सूत्र संचालन डॉ. आदित्य अभ्यंकर ने किया। जितेंद्र अभ्यंकर ने संपूर्ण वंदे मातरम् प्रस्तुत किया।

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