03 Jul 2025
जनरल बिपिन चंद्र जोशी जी का जीवन परिचय
वीर-वीरांगनाओं की जन्म स्थली देवभूमि उत्तराखण्ड के सुदूर पर्वतीय क्षेत्र पिथौरागढ़ में जन्मे बिपिन चंद्र जोशी जी का जन्म 5 दिसंबर सन् 1935 में हुआ था। आप अल्मोड़ा के अंतर्गत दन्या के मूल निवासी थे।
जनरल बिपिन चंद्र जोशी जी, भारतीय सेना के 17वें थल सेनाध्यक्ष (COAS) थे। आप 4 दिसंबर सन् 1956 में 64 कैवलरी रेजिमेंट में भारतीय सेना के बख्तरबंद कोर में कमिशन हुए। जनरल जोशी जी, भारतीय सेना में थल सेनाध्यक्ष पद पर पहुंचने वाले उत्तराखंड के पहले सैन्य अधिकारी थे। भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष बनने से पहले बिपिन चंद्र जोशी जी डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन और जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, दक्षिणी कमान जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके थे।
जनरल बी.सी. जोशी जी ने एक स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड और एक इन्फैंट्री डिवीजन की भी व्यवस्था की। सन् 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान पश्चिमी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट का प्रतिनिधित्व किया। मई 1973 से अक्टूबर 1976 तक ऑस्टेलिया में सैन्य सलाहकार रहे। सन् 1990 में कश्मीर में विद्रोह से लड़ने के लिए राष्ट्रीय राइफल्स का नेतृत्व किया। गाजा में संयुक्त राष्ट्र सेना में स्टाफ अधिकारी रहे।
जनरल बी.सी. जोशी जी को अपने असाधारण, उल्लेखनीय और प्रतिष्ठित सेवा के लिए परम विशिष्ट सेवा पदक (पीवीएसएम) और अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) सम्मान के साथ अनेकों सम्मान से विभूषित किया गया।
जनरल बी.सी. जोशी जी ने सन् 1966 में ‘द जनरल बी. सी. जोशी आर्मी पब्लिक स्कूल’ की स्थापना पिथौरागढ़ उत्तराखण्ड में और सन् 1994 में आर्मी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे की स्थापना की। एन.सी.सी. की तर्ज पर जनरल बी.सी. जोशी जी को हिमालय के पर्यावरण के संरक्षण के लिए इको टास्क फोर्स बनाने का श्रेय दिया जाता है। सेना में इसे पर्यावरण वाहिनी भी बोला जाता है।
जनरल बी.सी. जोशी जी का सन् 19 नवंबर 1994 नई दिल्ली के सैन्य अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह एक वर्ष पश्चात सन 1995 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने वाले थे। वह भारतीय सेना के एकमात्र जनरल रहे जिनकी सेवाकाल के मध्य मृत्यु हुई थी।
भारतीय सेना के सैनिक वर्ग के मध्य बेहद लोकप्रिय जनरल बी.सी. जोशी जी उत्तराखण्ड की सैन्य परम्परा के सर्वश्रेष्ठ सैनिकों में से एक थे, जिन्हें सदैव स्मरण रखा जाएगा।












