27 Oct 2025
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ — क्या, क्यों, कैसे !
लेखक: विजय कुमार
प्रकाशक: प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर समाज में अनेक जिज्ञासाएँ स्वाभाविक हैं — संघ क्या है? क्यों बना? इसकी कार्यपद्धति क्या है? इसकी व्यापकता और दृष्टि कितनी विराट है? संघ कार्यों की शताब्दी में यह और अधिक प्रासंगिक हो जाता है कि इस विचार को सरलता से समझा जा सके। इन्हीं सहज किंतु गहन प्रश्नों का सरल, सुसंगठित और प्रामाणिक उत्तर इस पुस्तक “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ — क्या, क्यों, कैसे” में विद्वान लेखक विजय कुमार जी ने प्रस्तुत किया है।
विजय कुमार जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दीर्घकालीन प्रचारक, चिंतक, विचारक और प्रखर लेखक रहे हैं। उन्होंने अनेक दशकों तक संगठन, समाज और राष्ट्र जीवन के विविध आयामों में सक्रिय भूमिका निभाई है। आपातकाल के कठिन काल में उन्होंने मेरठ कारागार में चार माह का कठोर कारावास सहा। उनका जीवन संघ के आदर्शों, निष्ठा और सेवा-भावना का सजीव उदाहरण है।
साहित्यिक क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है — उन्होंने 600 से अधिक लेख, कहानियाँ और निबंध देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित किए हैं। ‘राष्ट्रधर्म’ (लखनऊ) पत्रिका में आप सह संपादक रहे हैं ।
और आज भी एक प्रमुख सेवा-प्रकल्प माधव सेवा विश्राम सदन (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान,ऋषिकेश के समीप)में सक्रिय रूप से सेवा व्रती के रूप में योगदान दे रहे हैं। विभिन्न विषयों पर आपकी 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
यह नवीन कृति संघ को समझने का एक सुलभ माध्यम है। इसमें संघ के आद्य सर संघ चालक पूजनीय डॉ केशव बलिराम हेडगेवार की का प्रखर राष्ट्रप्रेम का संस्कार,साहस,समर्पण,स्वतंत्रता आंदोलन में तेजस्वी भूमिका, संघ विचार, उद्देश्य, गठन के कारण, तत्कालीन हिंदू जनमानस की मनोभूमि और समाज की परिस्थिति , संघ प्रारंभ करने के विचार का तत्कालीन राजनैतिक और सामाजिक प्रभाव,संघ की कार्यपद्धति, प्रचारक परंपरा, संगठन विस्तार, स्वयंसेवकों का समाज जीवन में समर्पण,आनुषंगिक संगठन, विचार परिवार,कार्यालयीन कार्यशैली, संघ शाखा, प्रार्थना तथा संघ की विराट दृष्टि , संघ प्रशिक्षण, राष्ट्र पर कोई युद्ध आपदा या सामान्य परिस्थिति में सेवा के प्रकल्प और अभियान,और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प का अत्यंत सहज भाषा में विवेचन किया गया है।
लेखक ने उन सभी प्रश्नों का समाधान सरल भाषा में किया है जो सामान्य समाज या स्वयंसेवक के मन में स्वाभाविक रूप से उठते हैं।

इस पुस्तक की प्रस्तावना प्रतिष्ठित राज्यसभा सांसद, विचारक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक, प्रोफेसर राकेश सिन्हा जी ने लिखी है — जो राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सांसद हैं और अपने गहन अध्ययन व राष्ट्रीय विमर्श में सक्रिय भूमिका के लिए प्रसिद्ध हैं। यह इस पुस्तक का एक विशिष्ट और गौरवपूर्ण पक्ष है।
लेखक द्वारा लिखी भूमिका भी विचारोत्तेजक है उन्हीं के अनुसार पुस्तक के प्रकाशन से पूर्व इसे संघ के वरिष्ठ प्रचारक आदरणीय स्वान्त रंजन जी ने देखा और मार्गदर्शन प्रदान किया है, जिससे इसकी विषयवस्तु और अधिक प्रामाणिक, संतुलित एवं सुसंगत बनी है।
सरल भाषा, स्पष्ट प्रस्तुति और जीवनानुभव की गहराई इस कृति को विशिष्ट बनाती है। संघ की विचारधारा, कार्यपद्धति और संगठन की आत्मा को समझने के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह पुस्तक एक मार्गदर्शक एवं संदर्भग्रंथ सिद्ध होगी।
यह पुस्तक विश्व संवाद केंद्र राजपुर रोड देहरादून में उपलब्ध है , पुस्तक का मूल्य वास्तविक मूल्य ₹350 है जिसे छूट के साथ ₹250 मूल्य में विश्व संवाद केंद्र से प्राप्त किया जा सकता है।
गजेन्द्र खंडूड़ी
विभाग प्रचार प्रमुख, देहरादून
उत्तराखण्ड।












