30 Oct 2025
पुस्तक का नाम:
‘सेवा है यज्ञकुंड’
लेखक: विक्रांत वीर संजय (उत्तराखंड प्रांत; प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ)
प्रस्तावना: श्रीमान विजय कुमार ( प्रचारक ,लेखक, चिंतक और प्रखर विचारक)
प्रकाशन: विश्व संवाद केंद्र, देहरादून
मूल्य: ₹25 मात्र
संघ की सेवा साधना का जीवंत दस्तावेज़
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में प्रकाशित “सेवा है यज्ञकुंड” पुस्तक संघ के सेवा कार्यों की प्रेरक कथा प्रस्तुत करती है। लेखक विक्रांत वीर संजय जी ने संघ के स्वयंसेवकों की सेवा भावना, संगठन शक्ति और त्यागपूर्ण जीवन को अत्यंत सजीवता से चित्रित किया है।
सेवा के विविध आयाम
पुस्तक में उत्तरांचल उत्थान परिषद, उत्तरांचल देवी आपदा पीड़ित सहायता समिति, स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसाइटी, सेवा भारती, विद्या भारती,वनवासी कल्याण आश्रम और माधव सेवा केंद्र जैसे संगठनों के माध्यम से चल रहे विविध सेवा कार्यों का प्रेरक विवरण है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, एकल विद्यालय,साक्षरता, दिव्यांग कल्याण, अनाथालय, संस्कार केन्द्र, चिकित्सा शिविर, जैविक कृषि, बीज,स्वाबलंबन,छात्रावास,पुस्तकालय, और विश्राम सदन—इन सबके माध्यम से संघ की “सेवा परंपरा” समाज में निःस्वार्थ भाव से कार्य कर रही है।
संघ की दृष्टि – सेवा ही साधना
लेखक का संदेश स्पष्ट है कि संघ में सेवा केवल सहायता नहीं, बल्कि यज्ञ का रूप है—जहाँ हर स्वयंसेवक अपने समय, श्रम और मन को समाज के कल्याण के यज्ञकुंड में अर्पित करता है।
आकार में लघु, किंतु विषय में गूढ़—यह पुस्तक संघ की सेवा-संस्कृति की आत्मा को उजागर करती है।
लेखन शैली प्रेरणादायक है और पाठक को समाजसेवा के वास्तविक अर्थ की ओर उन्मुख करती है।
“सेवा है यज्ञकुंड” केवल सेवा कार्यों का विवरण नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और राष्ट्रभाव की साधना का जीवंत ग्रंथ है।
यह पुस्तक प्रत्येक स्वयंसेवक और समाजसेवी के लिए पथप्रदर्शक है।
उपलब्धता: विश्व संवाद केंद्र, देहरादून — ₹25 मात्र












